ढलते हुए सूरज को देख के ऐ ग़ालिब
मैंने उसे कहा के कुछ पहर के ठहर तो जा
क्या पता आज शाम की चाय उनके साथ आखरी हो!!
- Pushkin Channan
मैंने उसे कहा के कुछ पहर के ठहर तो जा
क्या पता आज शाम की चाय उनके साथ आखरी हो!!
- Pushkin Channan
Driven by the means to communicate.....
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