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दर्द-ऐ-दिल

क्या गिला करता मैं तुझसे जब तेरा हाल ही ठीक नहीं
खुदा से भी क्या मांगता जब तू मेरे साथ नहीं।

ज़िद पर अड़ा है ये दिल
कौन सी, मुझे मालूम नहीं।

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