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ये वक़्त भी गुज़र जाएगा...

ये वक़्त यूँ ही गुज़र जाएगा
और इंतज़ार करता एक मुसाफिर रह जाएगा।
इंतज़ार उस सुन्हेरे पल का जो उसको आखरी बार दो वक़्त का सुकून दे जाएगा,
एक और बार उसके चेहरे पर मुस्कान छोड़ जाएगा।
मुस्कान वो जो शायद फिर कभी ना मिले,
क्योंकि ये वक़्त यूँ ही गुज़र जाएगा।

तरस जाएंगी ये निगाहें उसकी एक झलक को,
और वो फिर लौट के कभी ना आएगा।
फिर तुम भी सोचना के काश रोक लिया होता उसे
तो आज मेरे जाने के बाद जान ना निकलती।
और तुम अपनी कसम देकर मुझे जाने से ना रोकती,
अपनी बात मनवाने के लिए कोई ज़िद ना करती।
ये वक़्त भी गुज़र जाएगा....

               - Pushkin Channan

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