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ख्वाब और हक़ीक़त

उस चेहरे को कागज़ पर उतारने की कोशिश कर रहा था,
जिसे मैंने कल रात ख्वाब में देखा था।
ख्वाब था वो कोई हक़ीक़त नहीं जो कागज़ पर उतर जाती!!
लोग अक्सर ख्वाबों को हक़ीक़त से जोड़ने की गुस्ताखी कर बैठते हैं ।
तजुर्बे की कमी के चलते ऐसा कर बैठते हैं ।

                                 - Pushkin Channan


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