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Lamhe...

ज़रा सा उन लम्हों को समेट लूँ जो अब वापस नहीं आएँगे
ज़रा उन लम्हों को रोक लूँ जो यादें दिल में छोड़ जाएंगे
ज़रा कोशिश कर लूँ दोबारा से उन लम्हों को जीने की जो यादें बन जाएंगे
ज़रा सा और जी लूँ ये ज़िन्दगी यादगार बनाने के लिए
ज़रा फिर से शायरी कर लूँ काफिर की बेवफाई का सबूत इक्कठा करने के लिए
ज़रा सा लापरवाह हो जाऊं अपनों और गैरों के बीच में फर्क जानने के लिए
ज़रा सा वक़्त को रोक लूँ हसीन पल को आखरी बार जीने के लिए
ज़रा बचपन की उन पुरानी गलियों में फिर से चक्कर लगा लूँ जहाँ कभी पानी में अपनी भी कश्ती चला करती थी
यूँ ही ज़रा सा हर वो काम कर लूँ जिसे करने पर ख़ुशी मिला करती थी
ये वक़्त न ठहरा था और न ही ठहरेगा
वक़्त के साथ हालात और इंसान दोनों बदल जाते हैं और रहे जाती हैं तो सिर्फ यादें
वो यादें जो किसी के चले जाने के बाद आती हैं......

                        - Pushkin Channan

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