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Showing posts from August, 2016

A Random Thought....

Years back, I don't know what I was like and who I was? Though I would be the same as today, my name says it all. The statement seems to be a hypothetical. the reason being the fact is not clear!! Though years from now, I promise to b a better person as compared to present and knowing the reality of the world, I would limit myself from being available for everyone. Just the selected bunch of people around me. And those selected ones depend on the circles I make. The less I chill with the less bullshit I will deal with. Just love the people, in-fact the good people those who respect your presence and miss your absence. Apart from family if you are able to get such friends, you are the most luckiest one. Trust me, its hard to find selfless friends who be-friend you because you are good human being. Trust me if you find them do not let them go. Just be loyal to each other. Honesty is the best policy, after-all. 

"आखिर तू क्यों फिकर करता है"

“वो ऊँचे नीले आसमान में उड़ते हुए पंछी वो गहरे पानी में तैरती मछलियाँ वो लंबी इमारतों का आकाश को छूना मुझे इशारा कर रहे थे के ज़िन्दगी में सब कुछ आसान है। वो छोटे बच्चों का मदमस्त रहना वो गिर के फिरसे खड़े हो जाना कुछ तो ख़ास है इनकी हर मुस्कान में जो बड़े बड़े भी गलतियाँ अन्देखी कर देते हैं। मैंने खुद को भी समझाया के क्यों हर पल तू रहता घबराया जो है होना उसके लिए फिर कैसा माफीनामा। मैंने दिल को ये समझाया के दिल आखिर तू क्यों फिकर करता है जो होना है वो तो होना है।” Pushkin Channan 

An Ode to The Best Friend

"There’s no escaping and no denying,  I must admit it’s true I could never, ever love another  as much as I love you. You’ve helped me to see things clearly, Softer and far more tender than ever before, You’ve taught me, told me, inspired me, showed me. Every day that passes, I can love you only more. You’ve held my hand and listened  as I’ve bawled and screamed and cried. You’ve embraced me when I needed it the most,  and calmed the wounded beast that was hurting inside. You were patient and kind, never once did you mind w hen I thought I had lost my faith in it all. I knew you’d understand and be there for me. Never once did you let me fall. In you I have found my best of friends, You are more than I could ask. To describe the indescribable  Is now my most formidable task. I value each time we've shared together  But as our days turn to months and years, I see memories replacing those beautiful time that pass just like a water in the river. A

"दिल आखिर तू क्यों रोता है"

"दिल आखिर तू क्यों रोता है दुनिया का तरीका जब तुझे पता होता है दोस्ती भी ख़ास किसी से क्यों करता है दिल आखिर तू क्यों रोता है?? ये आंसू जब पलक तक आता है सूख कर निशान आपने छोड़ जाता है ये धूप, ये ग़म सब तेरा साथी बन जाता है मैंने दिल को ये समझाया दिल आखिर तू क्यों रोता है दुनिया में तो यूँ ही होता है।"                                                 - Pushkin Channan

"उस शोर में भी एक खामोशी सी थी....

"उस शोर में भी एक खामोशी सी थी। जब शाम को दफ्तर से मैं घर लौट रहा था, एक अजीब सा सन्नाटा था मानो सभी को एक सांप सूंघ गया था। उस शोर में एक ख़ामशी सी थी, जब ट्रेन में चढ़कर मैंने ये एहसास किया के सभी चेहरे नए थे। उस शोर में आज एक खामोशी देखी जब सदियों बाद मैं अपने घर की पुरानी गलियों में गया और महसूस किया के पड़ोसी बदल गए हैं। उस बच्चे की रोने की रोने की आवाज़ की खामोशी आज मैंने उस माँ के चेहरे पर देखी। अपने बच्चों की ख्वाहिशों को पूरा न कर पाने की दर्द की खामोशी आज मैंने उस पिता की आँखों में महसूस की । मैंने आज वो खामोशी भी देखी जब रक्षाबंधन पर बहन इस ज़िद पर खाना नहीं खाती के भाई को राखी बाँध कर उसके हाथ से पहला निवाला खाऊँगी। मैंने आज हर शोर में ख़ामोशी देखि और महसूस की......