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Life is a moh maya..

नींद गवा ली ही मैंने अपनी, कारण शायद हाथ लगी नाकामयाबी का है।
ऐसा लगता है के मेरी मंज़िल यहाँ नहीं कहीं और ही है।
पता लग जाए के जाना कहाँ है तो उधर पहुँच जाऊं मैं।
समाज में थोड़ी इज़्ज़त बना लूँ, थोड़ा सामाजिक बन जाऊं मैं।
असमंजस में जैसे पड़ी हुई हो मेरी दिमागी हालत,
सुकून को खोजते हुए कहीं जैसे गम के दरिया में डूब सी गई हो मेरी दिली ताकत।
दुनिया से दिलासे मुझे खूब मिले, मश्वरे भी उन्होंने खूब दिए।
काम आ जाए ऐसा मश्वरा अभी तक कोई दे नहीं पाया,
या अपने ही किसी स्वार्थ से मैं मश्वरा क़ुबूल नहीं पाया।
परेशान सा हो गया हूँ मैं अपनी रोज़मर्रा की ऐसी ज़िन्दगी से,
मन करता है के त्याग दूँ ये सब।
बनावटी सा बना कर रख दिया है संसार की चीज़ों ने,
कब तक ऐसे ही बनावट के सहारे चलता रहूँगा मैं??
दुनिया को जब देखा तो लगा के कुछ कर सकता हूँ मैं,
पर जब गाड़ी पटरी पर उतरी तो नक्शा कुछ और ही दिखा।
उस राह पर रोड़े बहुत थे, बहुत से पीछे धकेलने वाले थे।
कुछ ऐसे ही इंसानो को पहचानने की मैंने भूल कर दी,
तजुर्बे के कमी के कारन मुझसे ये गलती हो गई।
काश के ऊपर वाले ने मुझे ये ताकत दी होती,
तो; सही और गलत को पहचानने में मेरी मदद हो जाती, मेरी मदद हो जाती।
                       Pushkin Channan

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